Saturday, October 15, 2016

मुहर्रम - मुहर्रम और इमाम हुसैन की विशेषता

🌙SAHIH DEEN صحيح دين🌙

❄मुहर्रम और इमाम हुसैन की विशेषता❄
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🎋झण्डा ले जानेवाले की शहादत🎋

इमाम हुसैन (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हु) का झण्डा ले जाने वाले, हज़रत अब्बास बिन अली (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हु) आपसे जंग मे जाने की इज़ाज़त लेने गए. और कहा, 'मैं अली असगर और दुसरे छोटे बच्चो को प्यार से तड़पते नहीं देख सकता. मुझे इज़ाज़त दे की मैं नदी से जाकर पानी ले आउ.' इमाम हुसैन ने जवाब दिया, 'मैन तुमको जाने की इज़ाज़त कैसे दू जबकि तुम मेरे झण्डे को पकड़ने वाले हो?' मगर हज़रत अब्बास ने अपने शब्द को फिरसे दोहराया और जाने की ज़िद्द करने लगे. इमाम हुसैन ने उनको गले लगाया और इज़ाज़त दे दी. हज़रत अब्बास घोड़े पे सवार हुए और नदी की और चल पड़े.

जब दुश्मनो ने हज़रत अब्बास को नदी की और जाते हुए देखा, तो उन्होंजने रास्ता रोक दिया. हज़रत अब्बास चिल्लाये, 'ए कूफावाले, अल्लाह से डरो और शर्म करो की तुम रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) को मुह दिखने वाले हो. ये कितना शर्मनाक होगा की पहले तुम इमाम हुसैन को आने की दावत देते हो और फिर गद्दारी करते हो. और अब तुम दुश्मनो के साथ मिल गए और इमाम हुसैन की अहले अयाल को और साथियो को शहीद कर दिया. और ये भी कम नही हुआ तो, तुमने रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैयहे वसल्लम) के अहले अयाल के छोटे बच्चो को तड़पा रहे हो, उनको पानी की एक बूँद भी लेने नहीं देते और भूक प्यास से मरने देते हो.'

ज़रा सोचो, तुम आख़िरत के मैदान में रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) को क्या मुह दिखाओगे?' मगर वो जालिम दिल ने जवाब दिया की अगर पूरी दुनिया पानी से भर जाए, फिर भी वो उसमे से एक बूँद नहीं ले सकता. हज़रत अब्बास उत्तेजित हो गए और चिल्लाये, 'हुसैन अपने आप को क़ुर्बान कर देंगे मगर तुम जैसे शैतानो को कभी आत्मसमर्पण नहीं करेंगे.' वह ज़ालिम लोग ने हज़रत अब्बास को हर तरफ से घेर लिया मगर आप आगे बढ़ते रहे और घोड़े को पानी तक ले गए. आपने अपनी पानी की थैली भर ली और एक घूंट पीने की सोचा की आपको छोटे छोटे बच्चो की तरस याद आइ. आप यह बर्दास्त नहीं कर पाए की आप अपनी तरस बुझा ले और रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) के वो मुबारक बच्चे प्यासे रहे. आपने वो पानी की थैली अपने कंधो पे लगायी और खेमे की और घोड़े को घुमाया.

दुश्मनो में से ज़ोर से आवाज़ आइ, 'उसे रोको, उसे रोको. अगर हुसैन के खेमे तक पानी पहुँच गया तो हम में से कोई ज़िंदा नहीं बचेंगे.' भले ही आप चारो और से घेरे हुए थे, हज़रत अब्बास खेमे तक किसी भी हालात में पहुचना चाहते थे, इसलिए आपने जो जमकर हमला करते गए की दोनों और लाशो की ढेर होती गयी और खून की नदिया बहने लगी. तभी आपको ज़रारह नाम के शख्स ने पीछे से हमला किया जिसकी वजह से आपका दाया कन्धा जिस्म से अलग हो गया. आपने अपने बाएं कंधे पे पानी की थैली ली और उसी हाथ से लड़ने लगे. आपको नौफ़िल बिन अर्जक से दूसरा हमला हुआ और इस बार उनका बांया हाथ जिस्म से अलग हो गया. अब आपने पानी की थैली को अपने मुह से पकड़ लिया मगर पानी खेमे तक पहुचने वाला नहीं था. एक तीर आया और पानी की थैली चिर दिया और सारा पानी ज़मीन पर फैल गया. आपने लगातर हमले की वजह से ज़मीन के आगे घुटने टेक दिए और आवाज़ लगायी, 'ए भाई! मेरी खबर लीजिये.' इमाम हुसैन (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हु) उनकी और दौड़े और उनका जिस्म खून में लतपथ पड़ा हुआ पाया और देखा के आप जल्द ही शहादत का जाम पीने वाले है. हालात देख कर इमाम हुसैन बोल पड़े, 'अब मेरी कमर टूट गयी है.'जल्द ही आपकी रूह आपके जिस्म से परवाज़ कर गयी और इमाम हुसैन (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हु) आपके जिस्म को खेमे की और ले गए.
(इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन)
[तारिख ए कर्बला]

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