🌙SAHIH DEEN صحيح دين🌙
❄मुहर्रम और इमाम हुसैन की विशेषता❄
Post 013
📖पवित्र क़ुरान में इमाम हुसैन - मुबाहिला.📖
📃मुबाहिला के बारे में आयत.📃
पवित्र क़ुरान में अल्लाह त'आला फरमाते है:
"तो ए मेरे मेहबूब, कह दो उनसे जो आपसे आपके इल्म आने के बाद, ईसा के बारे में बार बार पूछते है, 'आओ, हम हमारे बेटे और आपके बेटे, हमारी औरते और आपकी औरते और हमारी रूह और अपनी रूह को बुलाते हैं, फिर हम ईमानदारी से दुआ करते हैं, और झूठे पर अल्लाह की लानत हैं।'"
(सूरत आल ए इमरान, आयत 61)
यह आयत नजरान के यहूदी के लिए नाज़िल हुई थी, जो रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैयहे वसल्लम) से हज़रात ईसा (अलैहिस'सलाम) के बारे मैं बहस करने आये थे. नजरान मदीना मुनव्वराह में यमन की और एक बड़ी अच्छी तरह से स्थापित शहर हैं। यह नजरान बिन ज़ैद के नाम पर रखा गया हैं। यह शहर नसरानी कौम का मुख्य स्थान था जिसका प्रभाव करीब ७३ गाँव के अर्धव्यास जितना था. ये शहर में एक प्रमुख चर्च जिसे नरैनी कौम अपना क़िबला समझते थे और उनकी कौम के काफी आलिम वह रहते थे. रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैयहे वसल्लम) के वफ़ात के एक साल पहले, उन्हें मिलने मदीना मुनव्वराह में करीब ६० लोगो का एक समूह आया. उस वक़्त के प्रभु बिशप, अब हैरिस भी उनमे शामिल थे. उनकी कौम के ६० में से २४ लोग अपने समुदाय की मलाई थे और २४ में से ३ तो बहुत ही महत्वपूर्ण थे. उनमे से एक अब्दुल मसीह था जिसकी मर्ज़ी के बिना, उनकी कौम के लोग कुछ नहीं करते थे; दूसरा था वह उनके ख़ज़ाने का निग्रा था जो उनकी कौम के सब खर्चे देखता था और तीसरा अब हरीसा था जो उनकी कौम के सबसे बड़ा आलिमो में था. सारा काफला असर की नमाज़ के, कीमती कीमती कपडे पेहेन के वक़्त मदीना मुनव्वराह पंहुचा जो कभी मदीना के लोगो ने नहीं देखे थे. वे सीधे मस्जिद ए नबवी शरीफ पहुँयचे जहा लोग असर की नमाज़ अदा कर रहे थे. वे लोग भी पश्चिम दिशा की और मुह करके इबादत करने लगे. रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) ने अपने सहाबी को इशारा किया की उन्हें उनकी इबादत ख़तम करने दी जाए.
[तफ़्सीर ए नईमी]
बग़वी फरमाते है की जब रसूलल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) ने ऊपर की आयत पढ़ी और बउन्हें मुबाहिला के लिए दावत दी तोह उन्होंने जहिज़हाक कर सोचने के लिए थोड़ा वक़्त माँगा. आकिब, जो उनमे सबसे बुद्धिमान था, कहने लगा, 'ए मेरे नसरानी भाई, आपको बहुत अच्छे से पता है की मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) एक सच्चे नबी है. इतिहास हमें सिखाता है की जब कोई काफला किसी नबी के सामने आमने सामने मुबाहिला के लिए आया, तो सब ख़तम हो गए, और अगर आप ये करना चाहते हो तो आप सब भी ख़तम किये जाओगे. इसलिए मेरी यही सलाह है आपसे की आप सब मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) के साथ समाधान कर ले और घर चले जाए. अगली सुबह, इमाम हुसैन को उठाये हुए और इमाम हसन ऊँगली पकडे हुए रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) चल दिए, आपके पीछे हज़रत फातिमा (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हा) और उनके पीछे हज़रत अली (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हु) चल रहे थे. तो जैसा कि ऊपर की आयत में बताया गया है, रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) ने इमाम हुसैन और इमाम हसन को अपने बेटे मान लिए. जब नसरानी ने यह नज़ारा देखा तो उनमे से एक आलिम चिल्ला उठा, 'ए मेरे भाई, मैं वो चेहरे देख रहा हू की जो वे दुआ के लिए हाथ उठा दे, तो खुद पहाड़ो को अपनी जगह से हटा दे. इसलिए, नबी से मुक़ाबला न करे और पीछे मुड़ जाए वरना ये दुनिया में नसरानी बाकी नही रहेगा.
[तफ़्सीर ए मज़हरी]
मेरे प्यारे नबी (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) के प्यारे उम्मती. यह बात सोचो की यह निश्चित था कि मुबाहिला के लिए दोनों समूह अपनी औरतो और बच्चो को साथ ले जाए. इस समय, रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) अपनी मुबारक आल में से हज़रत फातिमा, हज़रत अली, इमाम हसन, इमाम हुसैन (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हु) को चुना. इसलिए हम उम्मती हमेशा हज़रत इमाम हसन (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हु) और हज़रत इमाम हुसैन (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हु) को रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) के बेटे समझ कर ही याद करेंगे क्योंकि आपने खुद इन्हें अपने बेटे कहा है.
🌹🌹🌹
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😇Admin: 👼🏻Sufyan Dabhad +918460300402📱
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📃मुबाहिला के बारे में आयत.📃
पवित्र क़ुरान में अल्लाह त'आला फरमाते है:
"तो ए मेरे मेहबूब, कह दो उनसे जो आपसे आपके इल्म आने के बाद, ईसा के बारे में बार बार पूछते है, 'आओ, हम हमारे बेटे और आपके बेटे, हमारी औरते और आपकी औरते और हमारी रूह और अपनी रूह को बुलाते हैं, फिर हम ईमानदारी से दुआ करते हैं, और झूठे पर अल्लाह की लानत हैं।'"
(सूरत आल ए इमरान, आयत 61)
यह आयत नजरान के यहूदी के लिए नाज़िल हुई थी, जो रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैयहे वसल्लम) से हज़रात ईसा (अलैहिस'सलाम) के बारे मैं बहस करने आये थे. नजरान मदीना मुनव्वराह में यमन की और एक बड़ी अच्छी तरह से स्थापित शहर हैं। यह नजरान बिन ज़ैद के नाम पर रखा गया हैं। यह शहर नसरानी कौम का मुख्य स्थान था जिसका प्रभाव करीब ७३ गाँव के अर्धव्यास जितना था. ये शहर में एक प्रमुख चर्च जिसे नरैनी कौम अपना क़िबला समझते थे और उनकी कौम के काफी आलिम वह रहते थे. रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैयहे वसल्लम) के वफ़ात के एक साल पहले, उन्हें मिलने मदीना मुनव्वराह में करीब ६० लोगो का एक समूह आया. उस वक़्त के प्रभु बिशप, अब हैरिस भी उनमे शामिल थे. उनकी कौम के ६० में से २४ लोग अपने समुदाय की मलाई थे और २४ में से ३ तो बहुत ही महत्वपूर्ण थे. उनमे से एक अब्दुल मसीह था जिसकी मर्ज़ी के बिना, उनकी कौम के लोग कुछ नहीं करते थे; दूसरा था वह उनके ख़ज़ाने का निग्रा था जो उनकी कौम के सब खर्चे देखता था और तीसरा अब हरीसा था जो उनकी कौम के सबसे बड़ा आलिमो में था. सारा काफला असर की नमाज़ के, कीमती कीमती कपडे पेहेन के वक़्त मदीना मुनव्वराह पंहुचा जो कभी मदीना के लोगो ने नहीं देखे थे. वे सीधे मस्जिद ए नबवी शरीफ पहुँयचे जहा लोग असर की नमाज़ अदा कर रहे थे. वे लोग भी पश्चिम दिशा की और मुह करके इबादत करने लगे. रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) ने अपने सहाबी को इशारा किया की उन्हें उनकी इबादत ख़तम करने दी जाए.
[तफ़्सीर ए नईमी]
बग़वी फरमाते है की जब रसूलल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) ने ऊपर की आयत पढ़ी और बउन्हें मुबाहिला के लिए दावत दी तोह उन्होंने जहिज़हाक कर सोचने के लिए थोड़ा वक़्त माँगा. आकिब, जो उनमे सबसे बुद्धिमान था, कहने लगा, 'ए मेरे नसरानी भाई, आपको बहुत अच्छे से पता है की मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) एक सच्चे नबी है. इतिहास हमें सिखाता है की जब कोई काफला किसी नबी के सामने आमने सामने मुबाहिला के लिए आया, तो सब ख़तम हो गए, और अगर आप ये करना चाहते हो तो आप सब भी ख़तम किये जाओगे. इसलिए मेरी यही सलाह है आपसे की आप सब मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) के साथ समाधान कर ले और घर चले जाए. अगली सुबह, इमाम हुसैन को उठाये हुए और इमाम हसन ऊँगली पकडे हुए रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) चल दिए, आपके पीछे हज़रत फातिमा (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हा) और उनके पीछे हज़रत अली (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हु) चल रहे थे. तो जैसा कि ऊपर की आयत में बताया गया है, रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) ने इमाम हुसैन और इमाम हसन को अपने बेटे मान लिए. जब नसरानी ने यह नज़ारा देखा तो उनमे से एक आलिम चिल्ला उठा, 'ए मेरे भाई, मैं वो चेहरे देख रहा हू की जो वे दुआ के लिए हाथ उठा दे, तो खुद पहाड़ो को अपनी जगह से हटा दे. इसलिए, नबी से मुक़ाबला न करे और पीछे मुड़ जाए वरना ये दुनिया में नसरानी बाकी नही रहेगा.
[तफ़्सीर ए मज़हरी]
मेरे प्यारे नबी (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) के प्यारे उम्मती. यह बात सोचो की यह निश्चित था कि मुबाहिला के लिए दोनों समूह अपनी औरतो और बच्चो को साथ ले जाए. इस समय, रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) अपनी मुबारक आल में से हज़रत फातिमा, हज़रत अली, इमाम हसन, इमाम हुसैन (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हु) को चुना. इसलिए हम उम्मती हमेशा हज़रत इमाम हसन (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हु) और हज़रत इमाम हुसैन (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हु) को रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) के बेटे समझ कर ही याद करेंगे क्योंकि आपने खुद इन्हें अपने बेटे कहा है.
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