Tuesday, November 8, 2016

Divorce and Waiting Period

🌙SAHIH DEEN صحيح دين🌙

तलाक़ और इद्दत
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🗂इद्दत के दौरान शोहर की ज़िम्मेदारी - 02🗂

फिर भी, तलाक़ की वजह से, अगर औरत घरवालो को परेशान करती हो या कोसती हो, अपने शोहर का अपमान करती हो, अभद्र और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करती हो और घर का सुकून छिनती हो तो ये सब में उसे घर छोड़ने के लिए मजबूर करना जाइज़ है और ये बेहतर भी है. अल्लाह त'आला फरमाते है:

يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ إِذَا طَلَّقْتُمُ النِّسَاء فَطَلِّقُوهُنَّ لِعِدَّتِهِنَّ وَأَحْصُوا الْعِدَّةَ وَاتَّقُوا اللَّهَ رَبَّكُمْ لَا تُخْرِجُوهُنَّ مِن بُيُوتِهِنَّ وَلَا يَخْرُجْنَ إِلَّا أَن يَأْتِينَ بِفَاحِشَةٍ مُّبَيِّنَةٍ وَتِلْكَ حُدُودُ اللَّهِ وَمَن يَتَعَدَّ حُدُودَ اللَّهِ فَقَدْ ظَلَمَ نَفْسَهُ لَا تَدْرِي لَعَلَّ اللَّهَ يُحْدِثُ بَعْدَ ذَلِكَ أَمْراً

“ऐ नबी! जब तुम लोग स्त्रियों को तलाक़ दो तो उन्हें तलाक़ उनकी इद्दत के हिसाब से दो। और इद्दत की गणना करो और अल्लाह का डर रखो, जो तुम्हारा रब है। उन्हें उनके घरों से न निकालो और न वे स्वयं निकलें, सिवाय इसके कि वे कोई स्पष्ट। अशोभनीय कर्म कर बैठें। ये अल्लाह की नियत की हुई सीमाएँ है - और जो अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करे तो उसने स्वयं अपने आप पर ज़ुल्म किया - तुम नहीं जानते, कदाचित इस (तलाक़) के पश्चात अल्लाह कोई सूरत पैदा कर दे.”
(अत-तलाक: 1)

ये आयत इद्दत के हुक्म को सविस्‍तर से साफ़ समझाती है ताकि ये एहम वक़्त में आदमी और औरत दोनों कोई गलती न करे या एक दूसरे के हक़्क़ अदा करे क्योंकि भले ही तलाक़ निकाह को ख़त्म करती है, वो दोनों का एक दूसरे पे हक़्क़ है जब तक इद्दत का बताया वक़्त ख़त्म नहीं हो जाता और इस हुक्म को सम्मान और पूरा करना चाहिए.

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