🌙SAHIH DEEN صحيح دين🌙
तलाक़ और इद्दत
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🗂इद्दत के दौरान शोहर की ज़िम्मेदारी🗂
शोहर के पास ये अधिकार नहीं की वो अपनी बीवी को इद्दत ख़त्म होने से पहले अपना घर छोड़ने को कहे ताकि अगर वो चाहे तो इस दौरान सुलह कर ले. और तो और, एक घर में रहने की वजह से उनके बीच सुलह के रास्ते खुल जाते है क्योंकि दोनों एक दूसरे को रोज़ देखते और बात करते रहते है और जिस वजह से तलाक़ हुई थी वो मिट जाए और वो दोनों एक दूसरे के साथ रहने का फैसला कर ले. ये समझदारी वाली बात है जो शोहर को हक़्क़ नहीं देता अपनी बीवी को इद्दत के दौरान अपने घर में रहने से मना करने के लिए ताकि इस्लाम के कानून से उनकी शादी टूटने से बच जाए अगर इस होना है तो. क़ुरआन ए पाक फरमाता है:
يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ إِذَا طَلَّقْتُمُ النِّسَاء فَطَلِّقُوهُنَّ لِعِدَّتِهِنَّ وَأَحْصُوا الْعِدَّةَ وَاتَّقُوا اللَّهَ رَبَّكُمْ لَا تُخْرِجُوهُنَّ مِن بُيُوتِهِنَّ وَلَا يَخْرُجْنَ إِلَّا أَن يَأْتِينَ بِفَاحِشَةٍ مُّبَيِّنَةٍ وَتِلْكَ حُدُودُ اللَّهِ وَمَن يَتَعَدَّ حُدُودَ اللَّهِ فَقَدْ ظَلَمَ نَفْسَهُ لَا تَدْرِي لَعَلَّ اللَّهَ يُحْدِثُ بَعْدَ ذَلِكَ أَمْراً
“ऐ नबी! जब तुम लोग स्त्रियों को तलाक़ दो तो उन्हें तलाक़ उनकी इद्दत के हिसाब से दो। और इद्दत की गणना करो और अल्लाह का डर रखो, जो तुम्हारा रब है। उन्हें उनके घरों से न निकालो और न वे स्वयं निकलें, सिवाय इसके कि वे कोई स्पष्ट। अशोभनीय कर्म कर बैठें। ये अल्लाह की नियत की हुई सीमाएँ है - और जो अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करे तो उसने स्वयं अपने आप पर ज़ुल्म किया - तुम नहीं जानते, कदाचित इस (तलाक़) के पश्चात अल्लाह कोई सूरत पैदा कर दे.
(अत-तलाक - 1)
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