🌙SAHIH DEEN صحيح دين🌙
तलाक़ और इद्दत
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✅खुला - व्याख्या और आदेश - 02✅
मसला:
खुला औरत का समझौता को क़ुबूल करने पर है. अगर औरत सब देने को राज़ी हो जाए जो तय किया जाए तो न रुजू करने वाली तलाक़ जाइज़ होगी. अगर शोहर खुला के अलफ़ाज़ को केहड़े मगर बीवी ने शर्ते क़ुबूल नहीं की हो तो फिर उसके पास ये हक़्क़ नहीं के वो फिरसे रुजू करे या शर्ते बदले.
(खनिय, बहार)
मसला:
खुला औरत की तरफ से होता है जहा वो अपने आप को निकाह से छुड़वाने के लिए कुछ बदले में दे. अगर शोहर ने खुला के अलफ़ाज़ कह दिए मगर औरत ने शर्ते क़ुबूल नहीं की हो तो औरत रुजू कर सकती है या उसे कुछ वक़्त के लिए टाल सकती है. ये टालना तीन से लंबा हो सकता है अगर वो चाहे तो मगर जो लेन-देन तय किया था उसे तीन दिन से ज्यादा नहीं टालना चाहिए. अगर दोनों में से कोई एक मजमे को छोड़ कर चला जाता है तो औरत के शब्द नहीं गिने जाएंगे और नकार दिए जाएंगे.
(खनिय, बहार)
मसला:
इस वजह से के खुला एक मुआवजा है और ये औरत की समझदारी पे है की वो क्या क़ुबूल कर रही है या वो ये अलफ़ाज़ बिना समझे ही कह रही है तो फिर खुला जाइज़ नहीं होगा.
(दुर्र ए मुख़्तार, बहार)
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