🌙SAHIH DEEN صحيح دين🌙
तलाक़ और इद्दत
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🔊कसम वाले अलफ़ाज़ - 06🔊
मसला:
अगर कोई सख्स कसम काने की निय्यत रखकर कहे 'तू मेरे लिए हराम है' तो फिर वो कसम जाइज़ गिनी जायेगी और अगर इस करने का मक़सद उसकी माँ या बेहेन को राज़ी करने का हुआ तो कायमी तलाक़ लागू हो जायेगी. अगर नहीं तो ये रुजू वाली तलाक़ बन जायेगी और अगर उसका मक़सद तीन तलाक़ का था तो तीन तलाक़ लागू हो जायेगी. अगर बीवी उसके शोहर से कहे 'में तेरे लिए हराम हु' तो ये भी एक कसम गिनी जायेगी और अगर शोहर उसके साथ ताल्लुकात बनाने के लिए ज़बरदस्ती करता है या बीवी उसे ताल्लुकात बनाए की इज़ाज़त देती है तो फिर उसे कसम का जुरमाना देना पड़ेगा.
(दुर्र ए मुख़्तार, रद्द उल मुख़्तार, बहार)
मसला:
अगर शोहर अपनी बीवी से कहे 'तू मेरी माँ है' और उसकी निय्यत उससे हराम करने की है तो भी वो हराम न गिनी जायेगी और ये झूठ गिना जाएगा.
(जोहरा, बहार)
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