🌙SAHIH DEEN صحيح دين🌙
❄मुहर्रम और इमाम हुसैन की विशेषता❄
Post 022
🌦सुब्हे शहादत..🌦
आशुरे की रात ख़तम हो गयी और जंग के फैसले का दिन निकल आया. इमाम हुसैन (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हु) ने फज्र की नमाज़ पढाई. हालात ऐसे थे की सारे लोग तीन दिन से भूख और वयास की शिद्दत से तड़प रहे थे, किसी के मुह में खाने का एक लुकमा और पानी की एक बूंद भी नहीं गयी थी. और फिर बाइश हज़ार की फ़ौज से जंग करना जिनके पास खाने पीने और हथियार की कोई कमी न थी.
सूरज निकलने वाला था जब रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) के प्यारे नवासे, हज़रत अली और हज़रत फातिमा के शेर, दुश्मनो को उनकी फ़ौज के सामने अपने इल्मी अंदाज़ में आखरी चेतावनी देने के लिए खडे हुए जो इतिहास में सुनहरे अक्षरो से लिखा है. 'इ लोगो! मेरी बात सुनो और जल्दी मत करो ताकि आपको आगाह करने की मैं मेरी जिम्मेदारी निभा सकु, और मेरी यहाँ आने की वजह बता सकु. इसलिए अगर आप मेरी बात से राज़ी हो और सच्चाई को मानते हो तोह यह आपके हक़ में बेहतर होगा और आप नुकशान उठाने वालो में नहीं होंगे. अगर आप मेरी बात से राज़ी नहीं हो, तो उन् सबब से मिल जाओ जो आपकी बात से राज़ी हो और मेरे ऊपर हमला करदो. बेशक अल्लाह मेरी मदद करने वाला है, वही जिसने किताब उतारी और जो सच्चाई को पसंद करने वाला है. क्या आप मुझे जानते है मैं कौन हु? तो फिर अपने आप से पूछ लो अगर मुझे मारना क्या सही होगा? क्या मैं आपके रसूलअल्लाह का नवास नहीं हूँ? क्या मैं उनके साथी का बीटा नहीं हूँ? क्या शहीदों के सरदार, सय्यिदिना हमजा और सय्यिदिना जफ्फर तैयार मेरे चाचा नहीं है? क्या आप लोगो तक रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहजो अलैहे वसल्लम) का फरमान नहीं पंहुचा की मैं और मेरा भाई जन्नती जवानों के सरदार हैं? इसलिए अगर आप मानते हो तो बताइये.
अल्लाह की कसम! जिस दिन से मैंने जाना की झूठ बोलने से अल्लाह नाराज़ होते है तो मैंने झूठ बोलना छोड़ दिया. और अगर आपको लगता है की मैं झूठ बोल रहा हूं तो हज़रत जाबिर बिन अब्दुल्लाह, अबु सईद खुदरी, सुहैल बिन साद, ज़ैद बिन अकरम और अनस बिन मालिक जैसे लोगो से पूछो. यह रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) के सहाबा आपको सब बता देंगे की आपने क्या कहा था. क्या आप में से इस कोई नहीं जो मेरे क़त्ल होने को रोक सके? अगर आपको लगता है की मैं झूठ बोल रहा हूं या इस लगता है की मैं रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) का नवास नहीं हूं. अल्लाह की कसम, पूरब और पश्चिम के बीच इस कोई नहीं जो यह दावा कर सके की वह रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) का नवास है. आख़िरकार आप लोगो मेरा क़त्ल क्यों करना चाहते हो? क्या मैंने आप में से किसी को क़त्ल किया है? या आप में से किसी का माल लूट लिया हैं? क्यों आप मेरा खून बहन चाहते हो?
[इस्तिक़ामत दिसम्बर 1979, तिब्रानी भाग 7 पाना नं 329-330)
दुश्मनो में से कोई जवाब न आने पर, आपने कुछ लोगो को नाम से पुकारा और कहा, 'क्या आपने खत लिख कर मुझे कूफ़ा आने की दावत नहीं दी थी?.' लोगो ने न में जवाब दिया. आपने आगे कहा, 'आपने बेशक किया और अगर आपने नहीं किया था तो मुझे लौट जाने दो और अमन से रहने दो.' क़ैस बिन असहाब चिल्लाया, 'अपने आप को उबैदुल्लाह के हवाले करदो और आपको कोई नुक्सान नही पहुचायेगा.' इमाम ने जवाब दिया, 'आप ये कह सकते हो, क्योंकि आप मुहम्मद बिन असहाब के भाई हो. क्या आपके लिए ये काफी नहीं है की आप मुस्लिमबिन अक़ील की शहादत के लिए ज़िम्मेदार हो? अल्लाह की कसम! मैं ज़ुल्मकारो के साथ हाथ नहीं मिलाऊँगा नाही मैं अपने आप को उनके हवाले करके बेइज़्ज़ती सहन करूँगा.'
🌹🌹🌹
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🌦सुब्हे शहादत..🌦
आशुरे की रात ख़तम हो गयी और जंग के फैसले का दिन निकल आया. इमाम हुसैन (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हु) ने फज्र की नमाज़ पढाई. हालात ऐसे थे की सारे लोग तीन दिन से भूख और वयास की शिद्दत से तड़प रहे थे, किसी के मुह में खाने का एक लुकमा और पानी की एक बूंद भी नहीं गयी थी. और फिर बाइश हज़ार की फ़ौज से जंग करना जिनके पास खाने पीने और हथियार की कोई कमी न थी.
सूरज निकलने वाला था जब रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) के प्यारे नवासे, हज़रत अली और हज़रत फातिमा के शेर, दुश्मनो को उनकी फ़ौज के सामने अपने इल्मी अंदाज़ में आखरी चेतावनी देने के लिए खडे हुए जो इतिहास में सुनहरे अक्षरो से लिखा है. 'इ लोगो! मेरी बात सुनो और जल्दी मत करो ताकि आपको आगाह करने की मैं मेरी जिम्मेदारी निभा सकु, और मेरी यहाँ आने की वजह बता सकु. इसलिए अगर आप मेरी बात से राज़ी हो और सच्चाई को मानते हो तोह यह आपके हक़ में बेहतर होगा और आप नुकशान उठाने वालो में नहीं होंगे. अगर आप मेरी बात से राज़ी नहीं हो, तो उन् सबब से मिल जाओ जो आपकी बात से राज़ी हो और मेरे ऊपर हमला करदो. बेशक अल्लाह मेरी मदद करने वाला है, वही जिसने किताब उतारी और जो सच्चाई को पसंद करने वाला है. क्या आप मुझे जानते है मैं कौन हु? तो फिर अपने आप से पूछ लो अगर मुझे मारना क्या सही होगा? क्या मैं आपके रसूलअल्लाह का नवास नहीं हूँ? क्या मैं उनके साथी का बीटा नहीं हूँ? क्या शहीदों के सरदार, सय्यिदिना हमजा और सय्यिदिना जफ्फर तैयार मेरे चाचा नहीं है? क्या आप लोगो तक रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहजो अलैहे वसल्लम) का फरमान नहीं पंहुचा की मैं और मेरा भाई जन्नती जवानों के सरदार हैं? इसलिए अगर आप मानते हो तो बताइये.
अल्लाह की कसम! जिस दिन से मैंने जाना की झूठ बोलने से अल्लाह नाराज़ होते है तो मैंने झूठ बोलना छोड़ दिया. और अगर आपको लगता है की मैं झूठ बोल रहा हूं तो हज़रत जाबिर बिन अब्दुल्लाह, अबु सईद खुदरी, सुहैल बिन साद, ज़ैद बिन अकरम और अनस बिन मालिक जैसे लोगो से पूछो. यह रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) के सहाबा आपको सब बता देंगे की आपने क्या कहा था. क्या आप में से इस कोई नहीं जो मेरे क़त्ल होने को रोक सके? अगर आपको लगता है की मैं झूठ बोल रहा हूं या इस लगता है की मैं रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) का नवास नहीं हूं. अल्लाह की कसम, पूरब और पश्चिम के बीच इस कोई नहीं जो यह दावा कर सके की वह रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) का नवास है. आख़िरकार आप लोगो मेरा क़त्ल क्यों करना चाहते हो? क्या मैंने आप में से किसी को क़त्ल किया है? या आप में से किसी का माल लूट लिया हैं? क्यों आप मेरा खून बहन चाहते हो?
[इस्तिक़ामत दिसम्बर 1979, तिब्रानी भाग 7 पाना नं 329-330)
दुश्मनो में से कोई जवाब न आने पर, आपने कुछ लोगो को नाम से पुकारा और कहा, 'क्या आपने खत लिख कर मुझे कूफ़ा आने की दावत नहीं दी थी?.' लोगो ने न में जवाब दिया. आपने आगे कहा, 'आपने बेशक किया और अगर आपने नहीं किया था तो मुझे लौट जाने दो और अमन से रहने दो.' क़ैस बिन असहाब चिल्लाया, 'अपने आप को उबैदुल्लाह के हवाले करदो और आपको कोई नुक्सान नही पहुचायेगा.' इमाम ने जवाब दिया, 'आप ये कह सकते हो, क्योंकि आप मुहम्मद बिन असहाब के भाई हो. क्या आपके लिए ये काफी नहीं है की आप मुस्लिमबिन अक़ील की शहादत के लिए ज़िम्मेदार हो? अल्लाह की कसम! मैं ज़ुल्मकारो के साथ हाथ नहीं मिलाऊँगा नाही मैं अपने आप को उनके हवाले करके बेइज़्ज़ती सहन करूँगा.'
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