Tuesday, October 11, 2016

मुहर्रम - मुहर्रम और इमाम हुसैन की विशेषता

🌙SAHIH DEEN صحيح دين🌙

❄मुहर्रम और इमाम हुसैन की विशेषता❄
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🇸🇦दिल दहलानेवाली शहादत.🇸🇦

इमाम हुसैन (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हु) का बयान जो उनकी दुनयावी स्तिथी बयान करता था ताकि दुश्मनो के मन में कोई शक पैदा न हो, उसका उनपर कुछ फ़र्क़ नहीं हुआ. उल्टा, उन्होंने जंग की शुरुआत का ऐलान कर दिया और तीर चलने लगे. यह इमाम हुसैन (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हु) और उनके साथियो के लिए बहुत मुश्किल वक़्त था. एक एक करके वे अपने दुश्मनों को जहन्नुम की आग में भेजने लगे और खुद भी शहादत का मीठा जाम पीने लगे.

साथियो के बाद अब कुर्बानी पेश करने का वक़्त इमाम हुसैन (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हु) के घरवालो का था. हज़रत जाफर (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हु) तैयर के दोनों पोते, हज़रत ऑन और हज़रत मुहम्मद, हज़रात मुस्लिम बिन अक़ील के तीन भाई हज़रात अब्दुल्लाह, हज़रत अब्दुर्रहमान और हज़रत जफर, हज़रत अली के पांच बेटे, हज़रत अब्बास, हज़रत उस्मान, हज़रत अब्दुल्लाह, हज़रत मुहम्मद और हज़रत जफर एक एक करके इस्लाम के झंडा ऊपर रखने के लिए शहीद हो गए. इसी तरह, हज़रत इमाम हसन के साहबज़ादे, हज़रत क़ासिम, हज़रत अब्दुल्लाह, हज़रत उम्र और हज़रत अब बकर और हज़रत इमाम हुसैन (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हु) के साहबज़ादे  हज़रत अली अकबर और हज़रत अली असगर (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हु) भी उनके नखसे कदम पर चले.

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