Tuesday, October 4, 2016

मुहर्रम - मुहर्रम और इमाम हुसैन की विशेषता

🌙SAHIH DEEN صحيح دين🌙

❄मुहर्रम और इमाम हुसैन की विशेषता❄
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👹यज़ीद कौन था?👹

यज़ीद बिन मु'आवियाह एक दुर्भाग्यपूर्ण जीव था जिसका हाथ रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) के आल के खून से रंगे हुए थे. वो एक बहुत ही बदसूरत, मोटे, अशिष्ट, मादक और बुरा इंसान था. कई हराम काम उसने हलाल किए थे जैसे 'महरम' औरतो से निकाह और सूद की लेनदेन.

हज़रत अब्दुल्लाह बिन हज़रत हनज़लाह (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हु) फरमाते हैं:
'जब हमें यज़ीद के बुरे कामो का पता चला, तो हमे दर लगने लगा की अल्लाह त'आला हमसे नाराज़ होकर आसमान से पथ्थरो की बारिश फरमाएंगे, इसलिए हमने फैसला किया की हम यज़ीद से मुक़ाबला करेंगे. उसने हराम कामो को जाइज़ कर दिया था, जैसे की अपनी बेहेन से निकाह करना, शराब पीना प्रचलीत बन गया और नमाज़ के लिए लोगो अनियमित हो गए.
[तारिख उल खुलफ़ा]

हज़रत अब हुरैरह (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हु), जो रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) के एक गुप्त पदाधिकारियों में से हैं, अल्लाह त'आला से हिजरी ५९ में इस तरीके से दुआ करते थे:
'ए अल्लाह! मुझे हिजरी ६० का शाक्षी बनने से और क़ुरैश के नौजवानों (यज़ीद) के क्रूर शाशन से बचा.'
[तारिख उल खुलफ़ा]

हज़रत अब हुरैरह जो एक गुप्त बुद्धिमत्ता वाले थे जो रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) से उनको मिला था, बहुत अच्छे से जानते थे की हिजरी ६० में हज़रत मु'आवियाह (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हु) से यज़ीद शाशन करने लगेगा और इसलिए आपने ऊपर लिखी हुई दुआ पढ़ी जो क़ुबूल हुई और उनकी वफ़ात हिजरी ५९ में हुई. तारिख उल खुलफ़ा में लिखा है की हिजरी ६३ में यज़ीद को खबर मिली की मादिनः के लॉगफ़ो ने उसके साथ संधि तोड़ दी है और उसके साथ मुक़ाबला करने की तैयारी कर रहे है. यह सुनने पर उसने बड़ी फ़ौज मदीना की और भेजी और जंग का ऐलान किया.

मदीना की मुबारक विरासत को लूटने और ख़तम करने के बाद, वही फ़ौज ने मक्का मुकर्रमा पे हमला किया, जो तभी हज़रत अब्दुल्लाह बिन ज़ुबैर (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हु) के नेतृत्व में थी. तभी हिरा का हादसा हुआ.

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