🌙SAHIH DEEN صحيح دين🌙
❄मुहर्रम और इमाम हुसैन की विशेषता❄
Post 019
💐इमाम मुस्लिम के दोनों साहबज़ादे की शहादत.💐
इमाम मुस्लिम को शहीद करने के बाद, अत्याचारीओ ने उनके बच्चे को ढूँढना शुरू किया. उबैदुल्लाह ने ऐलान किया की जो भी उनके दोनों बच्चो को उसके पास लाएगा उसे बड़ा इनाम दिया जाएंगे, और जिसने उन्हें पनाह दी उनको क़त्ल किया जाएंगे. दोनों बच्चे क़ाज़ी शरह के पास थे, जिसने उबैदुल्लाह का ऐलान सुनने के बाद दोनों बच्चो को बुलाया और ज़ारो कतार रोने लगे. बच्चो ने वजह पूछी और पूछा की उनके वालिद को शहीद किया गया है क्या. जब आपने खबर की पुष्ठि की तोह दोनों बच्चे एक दूसरे को गले लग कर शोक मानाने लगे.
आधी रात, क़ाज़ी शरह ने बच्चो को एक काफ्ले के साथ जुड़ने का इंतज़ाम किया जो उन्हें मदीना ले जा सकता था. रात के अंधेरो की वजह से, दोनों बच्चे काफ्ले से जुड़ने से पहले रास्ता भटक गए. सुबह दोनों एक तालाब के किनारे बैठे थे जब उन्होंने एकक गुलाम बंदी को देखा और उसने इन्हें पहचान लिया. गुलाम बंदी ने उन्हें अपने मालिक के पास ले गयी. उनकी मालिक बहुत ही नेक थी और अहले बैत से वफादार थी. वह बच्चो को पा कर इतनी खुश हुई के उन्होंने अपनी गुलाम बंदी को आज़ाद कर दिया और खुद दोनों बच्चो की खिदमत में लग गयी. मगर उसका शोहर हारिस, उससे बिलकुल अलग था और बच्चो की तलाश करता था की कब वह बच्चो को ढूंढ ले और उबैदुल्लाह को सोंप दे ताकि उससे इनाम मिले. वह घर आया और बेखबर होकर सो गया की बच्चे तोह खुद उसी के घर में थे. मगर आधी रात को वह जोर से रोने की आवाज़ सुन कर उठ गया. बड़े बेटे ने छोटे को उठाया और कहा, 'उठो, यह सोने का वक़्त नहीं है, मैंने अभी अपने नाना, रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) का जन्नत में हज़रत फातिमी (रदी'अल्लाहो त'आला अंह) और हज़रत अली (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हु) का दीदार किया. मैंने अपने दोनों को भी वह अपने प्यारे वालिद के साथ देखा. फिर रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) ने हमारी और नज़र की और हमारे वालिद से कहा, 'ए मुस्लिम, तुम अकेले यहाँ आ गए और अपने दोनों बच्चो को अत्याचारीओ के पास पीछे छोड़ आये?' इमाम मुस्लिम ने कहा, 'या रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम)! यह हमारे पास जल्दी आएंगे और कल तक यहाँ पहुच जाएंगे.' बड़े भाई ने कहा, इसलिए भाई ऐसा लगता है कि हम भी जल्द ही शहीद हो जाएगा.' जब हारिस ने उन्हें देखा तोह उसने अपनी बीवी से पूछा की यह कोण है. उसकी बीवी बहुत डर गयी थी तो उसने बच्चो से खुद पूछा. बच्चो ने निडरता से अपनी पहचान बताई. वह ज़ालिम आदमी ने उनका हाथ पकड़ा और उन्हें घर से घसीट कर बाहर कर दिया. बच्चे दर्द और यातना की वजह से ज़ोर ज़ोर से रोने लगे. फिर उसने दोनों बच्चो को एक खच्चर पर रखा और उन्हें यूफरेट्स नदी के किनारे ले आया. वह इसने दोनों को सीधे खड़ा किया और अपनी तलवार निकाली मगर उसकी बीवी जो इनका पीछा कर रही थी, बीच में आकर इससे बिनती की और उससे अपना विचार बदलने को कहा और अपने हाथो को अहले बैत के खून से न रंगने को कहा.
मगर हारिस के सर पे शैतान सवार था और जोश में उसने अपनी बीवी धकेल दिया और वो ज़मीन पर गिर गयी. फिर वो बच्चो की तरफ आया. जैसे ही उसने छोटे भाई को मारने के लिए तलवार उठायी तो बड़ा भाई रोने लगा और उससे पहले शहीद करने की बिनती करने लगा क्योंकि वह अपने चवत्तीय भाई को शहीद होते हुए नहीं देख सकता था. यही अलफ़ाज़ छोटे भाई ने भी कहे. बूत उस शैतान को ये भी नहीं रोक सका और इसने दोनों को शहीद कर दिया.
(इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन)
🌹🌹🌹
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इमाम मुस्लिम को शहीद करने के बाद, अत्याचारीओ ने उनके बच्चे को ढूँढना शुरू किया. उबैदुल्लाह ने ऐलान किया की जो भी उनके दोनों बच्चो को उसके पास लाएगा उसे बड़ा इनाम दिया जाएंगे, और जिसने उन्हें पनाह दी उनको क़त्ल किया जाएंगे. दोनों बच्चे क़ाज़ी शरह के पास थे, जिसने उबैदुल्लाह का ऐलान सुनने के बाद दोनों बच्चो को बुलाया और ज़ारो कतार रोने लगे. बच्चो ने वजह पूछी और पूछा की उनके वालिद को शहीद किया गया है क्या. जब आपने खबर की पुष्ठि की तोह दोनों बच्चे एक दूसरे को गले लग कर शोक मानाने लगे.
आधी रात, क़ाज़ी शरह ने बच्चो को एक काफ्ले के साथ जुड़ने का इंतज़ाम किया जो उन्हें मदीना ले जा सकता था. रात के अंधेरो की वजह से, दोनों बच्चे काफ्ले से जुड़ने से पहले रास्ता भटक गए. सुबह दोनों एक तालाब के किनारे बैठे थे जब उन्होंने एकक गुलाम बंदी को देखा और उसने इन्हें पहचान लिया. गुलाम बंदी ने उन्हें अपने मालिक के पास ले गयी. उनकी मालिक बहुत ही नेक थी और अहले बैत से वफादार थी. वह बच्चो को पा कर इतनी खुश हुई के उन्होंने अपनी गुलाम बंदी को आज़ाद कर दिया और खुद दोनों बच्चो की खिदमत में लग गयी. मगर उसका शोहर हारिस, उससे बिलकुल अलग था और बच्चो की तलाश करता था की कब वह बच्चो को ढूंढ ले और उबैदुल्लाह को सोंप दे ताकि उससे इनाम मिले. वह घर आया और बेखबर होकर सो गया की बच्चे तोह खुद उसी के घर में थे. मगर आधी रात को वह जोर से रोने की आवाज़ सुन कर उठ गया. बड़े बेटे ने छोटे को उठाया और कहा, 'उठो, यह सोने का वक़्त नहीं है, मैंने अभी अपने नाना, रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) का जन्नत में हज़रत फातिमी (रदी'अल्लाहो त'आला अंह) और हज़रत अली (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हु) का दीदार किया. मैंने अपने दोनों को भी वह अपने प्यारे वालिद के साथ देखा. फिर रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) ने हमारी और नज़र की और हमारे वालिद से कहा, 'ए मुस्लिम, तुम अकेले यहाँ आ गए और अपने दोनों बच्चो को अत्याचारीओ के पास पीछे छोड़ आये?' इमाम मुस्लिम ने कहा, 'या रसूलअल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम)! यह हमारे पास जल्दी आएंगे और कल तक यहाँ पहुच जाएंगे.' बड़े भाई ने कहा, इसलिए भाई ऐसा लगता है कि हम भी जल्द ही शहीद हो जाएगा.' जब हारिस ने उन्हें देखा तोह उसने अपनी बीवी से पूछा की यह कोण है. उसकी बीवी बहुत डर गयी थी तो उसने बच्चो से खुद पूछा. बच्चो ने निडरता से अपनी पहचान बताई. वह ज़ालिम आदमी ने उनका हाथ पकड़ा और उन्हें घर से घसीट कर बाहर कर दिया. बच्चे दर्द और यातना की वजह से ज़ोर ज़ोर से रोने लगे. फिर उसने दोनों बच्चो को एक खच्चर पर रखा और उन्हें यूफरेट्स नदी के किनारे ले आया. वह इसने दोनों को सीधे खड़ा किया और अपनी तलवार निकाली मगर उसकी बीवी जो इनका पीछा कर रही थी, बीच में आकर इससे बिनती की और उससे अपना विचार बदलने को कहा और अपने हाथो को अहले बैत के खून से न रंगने को कहा.
मगर हारिस के सर पे शैतान सवार था और जोश में उसने अपनी बीवी धकेल दिया और वो ज़मीन पर गिर गयी. फिर वो बच्चो की तरफ आया. जैसे ही उसने छोटे भाई को मारने के लिए तलवार उठायी तो बड़ा भाई रोने लगा और उससे पहले शहीद करने की बिनती करने लगा क्योंकि वह अपने चवत्तीय भाई को शहीद होते हुए नहीं देख सकता था. यही अलफ़ाज़ छोटे भाई ने भी कहे. बूत उस शैतान को ये भी नहीं रोक सका और इसने दोनों को शहीद कर दिया.
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