Saturday, October 8, 2016

मुहर्रम - मुहर्रम और इमाम हुसैन की विशेषता

🌙SAHIH DEEN صحيح دين🌙

❄मुहर्रम और इमाम हुसैन की विशेषता❄
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🐎इमाम हुसैन (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हु) का रवाना होना.🐎

इमाम मुस्लिम का खत मिलने पर, इमाम हुसैन (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हु) ने ये अनुमान लगाया की अब रवाना होना सुरक्षित है और आप अपने ७२ साथियो के साथ कूफ़ा की और रवाना हुए. रास्ते में आप को इमाम मुस्लिम की शहादत और कूफ़ा के लोगो की गद्दारी के बारे में पता चला. जब कूफ़ा आने के करीब थे, हुर बिन रियाही एक हज़ार की सेना लेकर आया और कहने लगा, 'मैं उबैदुल्लाह के फरमान के हिसाब से आपको गिरफ्तार करने के लिए आया हूँ. मगर मैं आपकी इज़्ज़त करता हू इसलिए मैं आपको वापस चले जाने की सलाह देता हूँ.' इमाम हुसैन वह से रात में चलने लगे अरब सुबह तक एक उजाड़ मैदान तक पहुच गए जिसे कर्बला कहा जाता है. इमाम हुसैन (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हु) अपनी सवारी से उतरे और फ़रमाया:
'यह कर्बला है, दर्द और सब्र के इम्तेहान की जगह. यहाँ हमारे ऊंट बैठेंगे, यहाँ हम रुकेंगे और यही पर मेरे परिवार कुर्बान होगा.'

वह हिजरी ६१, २ ऋ मुहर्रम जुमेरात का दिन था. उबैदईललाह ने एक बड़ी सेना भेजी जिसने इमाम हुसैन के काफ्ले को घेर लिया और यूफ्रातेस नदी का पानी रोक दिया. अल्लाह अकबर! हौज़ ए कौसर के मालिक के नवासे और उसके परिवार के लिए पानी रोक दिया. सिर्फ औरतो और बच्चो का एक छोटा गिरोह को रखकर, हज़ारो सैनिको ने उन्हें घेर लिया. इमाम हुसैन (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हु) के पास दो कठिन विकल्प थे; यज़ीद से बैत हो जाए या फिर शहीद होने के लिए तैयार हो जाए. मगर इमाम हुसैन, जो सब्र और सहनशीलता की अज़ीम मिसाल थे, ने यज़ीद से बैत होने की बजाये शहीद होना पसंद किया

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