Sunday, October 9, 2016

मुहर्रम - मुहर्रम और इमाम हुसैन की विशेषता

🌙SAHIH DEEN صحيح دين🌙

❄मुहर्रम और इमाम हुसैन की विशेषता❄
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📡इमाम हुसैन (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हु) का खुतबा.📡

जब इमाम हुसैन को एहसास हुआ की दुश्मन आपके सर के अलावा सुलाह करने को राज़ी नहीं है, तो आपने अपने परिवार और साथी को बुलाया और कहा, 'मैं सबको मुझे यहाँ मुझे अकेला छोड़ने और वापस जाकर अपनी जान बचने की इज़ाज़त देता हूँ. मैं फिर भी तुम सब से राज़ी रहूँगा.' मगर सारे साथी गम में बोले 'हमारा आपको छोड़ कर जाने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता. हमके आपके लिए लड़ेंगे जब तक हमारे हाथ, गर्दन और पेशानी में ताक़त रहेगी और हम शहीद किये जाएंगे.'
उसके बाद, सब ने एक साथ नमाज़ अदा की और अल्लाह की याद मै रात गुज़ारी, और साथ ही काफिले के पीछे एक खाई बनायीं और उसे जलती लकड़ी से दिया ताकि दुश्मनों पीछे से हमला न करे।

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🌒आशूरा की रात.🌘

जंग की अगली रात, इमाम हुसैन (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हु) ने अल्लाह और उसके हबीब की याद में गुज़ारी. आप जंग के डर से डरे हुए नहीं थे नाही अपने मुक़द्दर पे अफ़सोस करते थे. असल में, आप अएलाह की रहमत और शांति और सौहार्द के साये में थे. आपने रसूलल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) को जंग के मैदान में फरिश्तो से घेरे हुए देखा. रसूलल्लाह (सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम) आपके करीब औए और सीने से लगा लिया और कहने लगे, 'बेटे! तुम्हारे दुश्मन तुम्हारी जान लेने के लिए पीछे पडे हैं, मगर वे क़यामत के दिन पर मेरी शफाअत से महरूम रह जाएंगे. ए मेरे बेटे! तुम ज़रा भी बेसब्री मत करना, जल्द ही तुम मेरे पास होंगे एंड मैं तुमको हौज़ ए कौसर से जाम पिलाऊंगा.'उसके बाद आप ने इनके लिए ये दुआ फरमाई:
'ए अल्लाह, इमाम हुसैन (रदी'अल्लाहो त'आला अन्हु) को सब्र और इनाम आता कर.'

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