Thursday, October 6, 2016

मुहर्रम - मुहर्रम और इमाम हुसैन की विशेषता

🌙SAHIH DEEN صحيح دين🌙

❄मुहर्रम और इमाम हुसैन की विशेषता❄
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🏴कूफ़ा के लोगो का मुकर जाना और इमाम मुस्लिम की शहादत🏴

जब यज़ीद को यह खबर हुई, तो उसने उबैदुल्लाह बिन ज़ियाद को कूफ़ा का राज्यपाल बनाया, जिसके पहले वह बसरा का राज्यपाल था. उबैदुल्लाह बहुत ही चालाक और निर्दयी किसम का इंसान था. जैसे ही वह कूफ़ा आया उसने कूफ़ा के लोगो को धमकी दी की अगर वे लोग इमाम मुस्लिम को साथ देना बंध नहीं करेंगे, तो उन्हें कैद किया जायेगा और क़त्ल किया जायेगा और यज़ीद की फ़ौज उनके घरो पे हमला करेंगी और उनके परिवार को क़त्ल और बर्बाद कर देंगी.

यह धमकी मिलने पर, कूफ़ा के लोग इमाम मुस्लिम का बहिष्कार करने लगे और करीब ही उनके पास कोई पैरवी करने वाला न था. जल्द ही उबैदुल्लाह ने इमाम मुस्लिम से मुक़ाबला करने के लिए अपनी फ़ौज भेज दी, जो अकेले हाथ निदर होकर लड़ते रहे और तलवारें और फ़ौज के तीरों का सामना करना पड़ा था जब आकिर में उनका सर एक पथ्थर से टकराया और उनका जिस्म खून में लथपथ हो गया.

आप ज़मीन पर गिर गए और मक्काह की तरफ रुख करके रोटी हुए कहा, 'इ मेरे भाई हुसैन बिन अली, देखो यह लोगो ने मेरे साथ क्या किया और मुझे दर है की यह आपके साथ भी इस ही बर्ताव करेंगे, बूत यह मैं आपको कैसे बताऊ और यहाँ आने से रोकक लू?' आखिर में, इमाम मुस्लिम को कैद किये गए और उबैदुल्लाह के पास लाये गए जिसने आपको बेरहमी से शहीद किया.
(इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन)

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